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  • By: Admin
  • Posted On:
  • 15-Jan-2018
  • Update On:
  • 15-Jan-18
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ग्वालियर

हमारे देश में प्रत्येक वस्तु -  जलवायु, धर्म, धन असमान मात्रा में व्याप्त है । जलवायु
की विभिन्नता मनुष्य को प्रत्येक स्थिति में अनुकूल रहना सिखाती है । धर्म की विभिन्नता प्रत्येक समुदाय के व्यक्ति को अपने -अपने धर्म का पालन करना सिखाती है, लेकिन धन की विभिन्नता होने से देश में  अमीरी - गरीबी की स्थिति उत्पन्न करती है । मेरी सोच है कि क्यों न देश में धन और धर्म अपनी  समान मात्रा में व्याप्त हो जाए । यदि हम सबका एक धर्म - मानव धर्म हो तो देश में धर्म की आढ़ के दंगे न होंगे और यदि देश के  सभी लोग समान रूप से धन से सम्पन्न हों तो देश से अमीरी की लालच कम हो या न हो मगर गरीबी जैसी समस्या जरूर खत्म हो जाएगी । खैर यह तो हुआ काल्पनिक तथ्य वास्तविकता तो यह है कि हमारे देश में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं तथा गरीब और गरीब ।

देश में अनेक समस्याएं हैं जो देश के विकास को दीमक की तरह खोखला कर रही हैं लेकिन मेरा मानना है कि देश में सबसे पहले गरीबी की समस्या का समाधान हो ताकि देश का प्रत्येक व्यक्ति अपनी हर प्राथमिक जरूरत को पूरा कर सके और देश के विकास का अंश बन सके ।

आईए डालते है एक नजर इन तथ्यों पर भी

         

      

        

      


गरीबी का एकमात्र समाधान है - शिक्षा । गरीबी कभी गरीब होने से उत्पन्न नहीं होती बल्कि गरीब बनकर शिक्षा प्राप्त न करने से पनपती है । वास्तव में यह मैंने भी देखा है कि आज के समय में भी कितने अशिक्षित लोग मजदूरी कर रहे हैं और शिक्षित लोग ऊंचा पद प्राप्त कर उन मजदूरों को निर्देशन देते हैं ।अतः देश से गरीबी तभी समाप्त होगी जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा की अहमियत होगी ।


लेखिका- अंजू पारवानी

ग्वालियर


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