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  • By: Admin
  • Posted On:
  • 07-May-2018
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ग्वालियर
मेरे अनुसार प्रकृति की अनेक प्रदत्त सम्पदाओं जैसे फूल, बाग, नदियां और अन्य विभिन्न सराहनीय तत्वों के समान ही प्रत्येक नारी है ,  जो प्रशंसा और सराहना की हकदार है न कि जबरन भोग और उपयोग करने की ! 

 मैं भी एक लड़की हूँ और जब किसी लड़की के साथ कोई अपराध होता हुआ देखती या सुनती हूँ तो घृणा होती है  ऐसे समाज से जो अपनी बेटी - बहन को बेटी समझते हैं और दूसरे की बेटी को बुरी नजर से देखते हैं ।

  ' मेरा भारत महान ' ये  नारा यकीनन किसी धृतराष्ट्र ने ही दिया होगा ,  जो भारत में चले आ रहे स्त्री के अपमान को अपनी नेत्रहीनता के कारण देख ही न सका ,  जहाँ महाभारत के युद्ध की वजह भी एक स्त्री का अपमान ही था । वो स्त्री चाहे कल की द्रोपती हो या वर्तमान की दामिनी या आसिफा !  न जाने कब खत्म होगी यह दरिन्दगी और न जाने और  कितने न्यायालयों में स्त्री के अपमान के महाभारत के युद्ध बाकी हैं  ?  जो प्रत्येक स्त्री को न्याय दिला सके ! लेकिन इस न्याय से भी क्या वास्तव में उन पीङित स्त्रियों को न्याय मिल जाता है ? क्या न्यायालय में गुहार करने से ,  लोगों के द्वारा मोर्चे निकालने,  मोमबत्तियाँ जलाने से  उनकी आबरू उन्हें वापस मिल जाती है !  नहीं  बल्कि होता यह है कि उन्हें न्याय मिलने से पहले ही वे अपनी जान गंवा देती हैं ,  कोई जिंदा भी रह गई तो उसे  समाज जीने नहीं देता ।

कब तक चलेगी यह दरिन्दगी ?  कैसा आजाद देश है ?  कैसी व्यवस्था है !  जहाँ हम महफूज नहीं हैं अपने ही देश में !  क्या हो गया है इस देश के इंसान को जो हैवानियत पर उतर आया है ! 

     लड़कियों को हमेशा सिखाया - पढ़ाया जाता है बैड-टच और गुड-टच के बारे में , रात में लड़कियाँ जॉब - ट्रेवल  नहीं कर सकतीं और पता नहीं कितनी ही पाबंदियाँ !  उन अपराधियों को भी सिखाया जाना  चाहिए कि अपनी माँ- बहन की तरह अन्य लड़कियों की भी इज्जत करें !

लेखिका-अन्जू पारवानी


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