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  • By: Admin
  • Posted On:
  • 25-Mar-2017
  • Update On:
  • 26-Mar-17
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नई दिल्ली

कहते है प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। जरूरत है अपने अंदर की कला को पहचाने की उसे निखारने की और दुनिया तक पहुंचाने की। वंदना तिवारी जब फोर्थ क्लास में थी तब उन्होंने आर्ट के क्षेत्र में अपना पहला अवार्ड जीता। वंदना बताती है कि वह एक सफल आर्टिस्ट बनना चाहती है। वो बताती है कि उन्होंने पेंटिंग की शिक्षा किसी से भी नहीं ली। वंदना एमबीए (एचआर ) करने के बाद इस समय जॉब कर रही है । जॉब के बाद जब भी उन्हें समय मिलता है वे पेंटिंग बनाना पसंद करती है।



पेंटिंग के अलावा वंदना को डांसिंग करना भी काफी पसंद है। खाली समय में वह अपनी हॉबी पर ध्यान देती है। अभी तक वह 300 से भी ज्यादा पेंटिंग को बना चुकी है । साथ ही कई जगहों पर अपनी कला को प्रदर्शित भी कर चुकी हैं। इस दौरान कई बार वंदना को उनकी अनोखी कला के लिए पुरस्कृत भी किया जा चुका है। वह कहती है कि कला में निखार लाने के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है, इसलिए जॉब के बाद का समय वह पेंटिंग के लिए देती है।






आर्टिस्ट वंदना कहती है कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है। मंजिल को पाने के लिए मेहनत और धैर्य की जरूरत होती। आज मैं ज्यादा से ज्यादा समय पेंटिंग बनाने में बिताती हूं। उम्मीद है कि एक दिन मेरी कला को भी दुनिया भर में पहचान मिलेगा।




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