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  • By: Admin
  • Posted On:
  • 25-Jun-2017
  • Update On:
  • 25-Jun-17
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माँ के बारे में क्या लिखूँ , माँ ने खुद मुझे लिखा हैं.
जन्नत क्यों ढूँढती फिरु , जब माँ के चरणों सर झुका रखा हैं.
 प्यार क्यों यहां वहां ढूंढती रहूँ , जब माँ के आँचल में सर रखा हैं .
किस्मत से क्यों डरती रहूं , जब ने अपने दोनों हाथों से आशीर्वाद दे रखा हैं.
क्यों अकेला महसूस करूं , जब माँ ने अपनी बांहों में बाँध रखा रखा हैं.
क्यों राहों पर चलने से डरु , जब माँ ने हाथों को थाम रखा है.
 क्यों अपनी मौत से डरु , जब माँ अपनी धड़कन से जोड़ रखा हैं.
 माँ के बारे में क्या लिखूँ , माँ ने खुद मुझे लिखा हैं.



           कृति जैन
ज्योति विद्यापीठ जयपुर (स्टूडेंट)


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