• Posted by admin on Date Sep 3, 2018
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    सांध्यकालीन कॉलेज लगाएं उम्मीदों को पंख

    evening college in delhi

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने का अपना ही रोमांच है। इस कारण देश भर से स्टूडेंट्स दिल्ली आते हैं। ऐसे युवाओं को अगर प्रात कालीन वाली पाली में एडमिशन नहीं मिल पाता तो सांध्य कॉलेजों (evening college)में भी जाने से परहेज नहीं करते। आईए जानते है सांध्यकालीन कोर्स में दाखिला लेने से क्या फायदा होता है।

    अगर प्रातकालीन कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता तो कहानी यही खत्म नहीं हो जाती है। स्कूलों की तरह दिल्ली विश्नविद्यालय में कई कॉलेजो में दूसरी पाली में पढ़ने -पढ़ाने की व्यवस्था है। ऐसे छात्र इनमें दाखिला पाकर अपनी मंजिल को हासिल कर सकते है। यहां छात्रों को प्रात कालीन पालियों की तरह कम कट ऑफ में ही बहुत सारे कोर्स में दाखिला पाने की उम्मीद बनी रहती है। दूसरी बात यह है कि जो फायदा सांध्य में पढ़ने वाले बच्चों को मिलता है वह सुबह में पढ़ने वाले छात्रों को महीं। डिग्री दोनो को एक ही जैसी मिलती है बस फर्क सिर्फ पालियों का होता है।

    काम के साथ कर सकते है पढ़ाई
    बहुत सारे युवा दिन में रोजगार के काम में लगे रहते हैं। उन्हें मजबूरी के कारण पढ़ाई के साथ कमाई का साधन भी अख्तियार करना पड़ता है। सांध्याकालीन कॉलेज इस सुविधा को ध्यान में रखकर ही 50-60 साल पहले शुरू किए गए थे। तब ऐसे युवाओं की तादाद बहुत थी, जो दिन में किसी कंपनी या संस्थान में काम करते थे। उन्हें शाम को यहां आकर क्लास करने की सुविधा देने के लिहाज से ऐसे कॉलेज शुरू किए गए थे। इन कॉलेजों में ऐसे कोर्स भी चलाए गए जो शाम में ही चल सकते है। आगे चलकर समय की जरूरतों ने इन कॉलेजों का प्रोफाइल बदल दिया। अब कामकाजी की जगह ऐसे छात्र बड़ी संख्या में आते हैं जिन्हें प्रात कालीन कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलता। उन्हें इन कॉलेजों में दाखिला पाने का सबसे बड़ा फायदा है कि वे दिन में किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकते , किसी संस्थान या कंपनी में पार्ट टाइम नौकरी कर सकते है।

    प्रोफाइल में बदलाव
    अब इन कॉलेजों के प्रोफाइल में अच्छा खासा बदलाव आय़ा है।य़ अब सुबह औऱ शाम के कॉलेजों को लगभग एक ही नजरिए से देखा जाने लगा है। सांध्यकालीन में पहले 6 बज् से कक्षाएं शुरू होती थी लेकिन अब ऐसे कॉलेजों को शाम 4 बजे से ही शुरू कर दिया जाता है। पहले सिर्फ लड़के ही इन कॉलेजों में नजर आते थे लेकिन अब लड़कियों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है। उनकी संख्या अब 50 प्रतिशत हो गई है।

    आर्ट और कॉमर्स की है लोकप्रियता
    सांध्याकालीन कॉलेजों में मूलत आर्ट्स के विषय जैसे अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल आदि विषयों की पढ़ाई होती है। उन्हें विज्ञान जैसे विषय पढ़ने के लिए ऑफर नहीं किया जाता है। लैब की सुविधा इन कॉलेजों में नहीं है। इसके अलावा कॉर्मस के कोर्स भी ऐसे छात्र के लिए है। जो छात्र बीए और बीकॉम की डिग्री लेना चाहते है वे कॉलेजों में दाखिला ले सकते है।

    किन कॉलेजों में है सांध्याकालीन पाली
    पीजीजीएवी, शहीद भगत सिंह, अरबिंदो कॉलेज, मोतीलात नेहरू , श्यामलाल , जाकिर हुसैन कॉलेज और सत्यवती कॉलेज में दूसरी पाली में भी क्लास चलती है। ये कॉलेज दिल्ली के अलग अलग कोने पर है।

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