• Posted by admin on Date Nov 9, 2018
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    National Education Day : मौलाना आजाद की ही देन है आईआईटी और यूजीसी

    national education day in hindi

    कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद की जंयती पर हर साल नेशनल एजुकेशन डे सेलिब्रेट किया जाता है। नेशनल एजुकेशन डे हर साल 11 नवंबर को मनाया जाता है। आपको बता दें कि मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री होने के साथ ही वह एक प्रसिद्ध विद्वान थे।

    उन्होंने हिंदु- मुस्लिल एकता के लिए कार्य किया। इतना ही नहीं वे अलग मुस्लिम राष्ट्र बनाने के सिद्धांत के खिलाफ भी थे। खिलाफत आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1923 में वे भारतीय नेशनल काग्रेंस के सबसे कम उम्र के प्रेसीडेंट बने। वे  1940 और 1945  के बीच काग्रेंस के प्रेसीडेंट रहे। आजादी के बाद वे भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने।

    मौलाना आज़ाद अफगान उलेमाओं के खानदार से ताल्लुक रखते थे। उनकी मां अरबी  मूल की थीं और उनके पिता मोहम्मद खैरुद्दीन एक फारसी थे। जब आज़ाद मात्र 11 साल के थे तब उनकी माता का देहांत हो गया। उनकी आरंभिक शिक्षा इस्लामी तौर तरीकों से हुई। घर पर या मस्ज़िद में उन्हें उनके पिता तथा बाद में अन्य विद्वानों ने पढ़ाया।

    इस्लामी शिक्षा के अलावा उन्हें  दर्शनशास्त्र, इतिहास और गणित  की शिक्षा मिली। इसके अलावा आजाद ने ऊर्दू, फारसी, हिंदी, अरबी तथा अंग्रेजी भाषोओं में महारथ हासिल की । सोलह साल उन्हें वो सभी शिक्षा मिल गई थीं जो आमतौर पर 25 साल में मिला करती थी।

    आजाद अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ थे। उन्हेंने अंग्रेजी सरकार को आम आदमी के शोषण के लिए जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने अपने समय के मुस्लिम नेताओं की भी आलोचना की जो उनके अनुसार देश के हित के समक्ष साम्प्रदायिक हित को तरज़ीह दे रहे थे।

    अन्य मुस्लिम नेताओं से अलग उन्होने 1905 में बंगाल के विभाजन का विरोध किया और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के अलगाववादी विचारधारा को खारिज़ कर दिया। उन्होंने ईरान, इराक़ मिस्र तथा सीरिया की यात्राएं की। आजाद ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेना आरंभ किया और उन्हें श्री अरबिन्दो और श्यामसुन्हर चक्रवर्ती जैसे क्रांतिकारियों से समर्थन मिला।

    स्वतंत्रता के बाद वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना में उनके सबसे अविस्मरणीय कार्यों में से एक था। उन्होंने ग्यारह वर्षों तक राष्ट्र की शिक्षा नीति का मार्गदर्शन किया। मौलाना आज़ाद को ही ‘भारतीय प्रद्योगिकी संस्थान’ अर्थात ‘आई.आई.टी.’ और ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ की स्थापना का श्रेय है। उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को विकिसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की। जिसमें संगीत नाटक अकादमी (1953), साहित्य अकादमी (1954), ललितकला अकादमी (1954) आदि शामिल हैं।

     

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