• Posted by admin on Date Sep 30, 2018
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    मद्रास हाईकोर्ट का आदेश : 80 प्रतिशत से कम स्कोर पर विदेशी मेडिकल स्टूडेंट्स को नहीं मिलेगा पात्रता प्रमाण पत्र

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    भारतीय स्टूडेंट्स जिसें देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल पाता है वह चीन, रूस, बांग्लादेश, नेपाल,यूक्रेन आदि से MBBS कर लेते हैं। लेकिन एमसीआई द्वारा लिए जाने वाले स्क्रीनिंग टेस्ट या फिर फॉरेन से मेडिकल की पढ़ाई करने आने वालों छात्रों के लिए होने वाली फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (FMGE) में कम प्रतिशत मार्क्स प्राप्त करते है। ऐसे स्टूडेंट्स को मद्रास हाईकोर्ट ने एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट इश्यू करने से एमसीआई को रोक लगा दी है। आपको बता दे कि एमसीआई का स्क्रीनिंग टेस्ट पास करने वाले छात्रों का प्रतिशत सिर्फ 13 से 27 प्रतिशत है।

    एमसीआई स्क्रीनिंग टेस्ट को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) के रूप में भी जाना जाता है जो विदेशी चिकित्सा स्नातकों के लिए अनिवार्य है और भारत में पेशे का अभ्यास करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित किया जाता है।

    यह  एग्जाम तभी ही लिया जाता है जब अभ्यार्थी का 12वीं एग्जाम में उनका स्कोर 80 प्रतिशत से कम होगा। अदालत ने आदेश दिया है कि ऐसे उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता अंक 50 प्रतिशत से कम से कम 80 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए।

    एमसीआई परीक्षा: स्क्रीनिंग परीक्षण की निकासी

    अदालत में न्यायमूर्ति एन किरुबाकरन ने कहा, पिछले 10 वर्षों में, विदेशी डिग्री प्राप्त डॉक्टरों में से सिर्फ 15 से 25 प्रतिशत डॉक्टर ही इस स्क्रीनिंग टेस्ट को पास कर सके हैं।

    95 प्रतिशत से अधिक अंक वाले छात्र सीट पाने में असमर्थ थे

    पीटीआई के मुताबिक, जब  12वीं में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यार्थी भारत में मेडिकल सीट में अपनी जगह नहीं बना पाते है। ऐसे में मद्रास हाईकोर्ट का कहना है जिन छात्रों को 95 प्रतिशत मार्क्स आने के बाद भी देश में मेडिकल कॉलेजों में जगह नहीं मिल पाता है वैसे में 50 प्रतिशत मार्क्स प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को विदेश में चिकत्सा की पढ़ाई के लिए कैसे अनुमति मिल जाती है।

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