• Posted by admin on Date Sep 2, 2018
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    सफलता की कहानी : स्पेस एजेंसी नासा भी हुई कायल

    कुछ कर गुजरने का दम हो तो आसमान की ऊंचाई भी कुछ नहीं है। इसी बात को चरितार्थ किया है 18 साल के भारतीय नवयुवक  रिफत शारूक ने , जिसकी नाम की खूब चर्चा है।

    तमिलनाडु के पल्लापत्ती में रहने वाले रिफत शारूक ने ऐसा कमाल किया है कि प्रतिष्ठित स्पेस एजेंसी नासा भी उसकी कायल हो गई है। इतनी ही नहीं इस नवयुवक ने ग्लोबल स्पेस रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।

    इस भारतीय छाक्ष ने दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट बनाया है। जिसे दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नसा 21 जून को स्पेस में लॉन्च किया। ऐसा पहली बार हो रहा है ज नासा किसी भारतीय छात्र के प्रयोग को अपने मिशन में शामिल कर रही है।

    12वीं के छात्र रिफत शरूक द्वारा तैयार कलामसैट सैटेलाइट को दुनिया का सबसे छोटा सैलेलाइट कहा जा रहा है। इस सैटेलाइट का नाम भारत के महान वैज्ञानिक पूर्व राष्ट्रपति स्व.एपीजी अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। नासा के 240 मिनट के मिशन में कलामसैट 12 मिनट के बाद ऑर्बिट में छोड़ दिया गया। कलामसैट में कई तरह के सेंसर और सोलर पैनल भी लगाए गए है।

    रिफत के अनुसार कलामसैट को कार्बन फाइबर पॉलिमर से बनाया गया है। जो किसी स्मार्टफोन से भी हल्का है। नासा के कॉन्टेस्ट क्यूब्स इन स्पेस और आई डूडल इन स्पेस और आई डूडल लर्निंग के तहत इसे बनाया गया है। यह सैटेलाइट एक टेक्नोलॉजी डेमॉन्सट्रेटर की तरह काम करेगा। नासा के मिशन से 3 डी प्रिंटेड कार्बन फाइबर की परफॉर्मेंस को प्रदर्शित किया जाएगा।

    रिफत का कहना है कि सैटेलाइट को बनाने के लिए सबसे कठिन काम हल्के मैटीरियस को खोजना था। इसके लिए काफी रिसर्च करनी पड़ी उन्होंने कहा कि इसे बनाकर मैं बहुत खुश हूं। रिफतने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए कुछ अलग कर गुजरने की जिद में इस सैटेलाइट को बनाकर अपनी कामयाबी की नई कहानी की शुरुआत की है। और वे पने इस यात्रा को जारी रखेंगे।

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