• Posted by admin on Date Sep 5, 2018
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     शिक्षक दिवस – ज्ञान की उजागरता का घोतक

    भारत में सन् 1962 से 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है । इस दिन महान शिक्षाविद् और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था , लेकिन डॉ राधाकृष्णन के जन्म पर ही शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है ?  , इसके पीछे कारण है डॉ राधाकृष्णन के उत्कृष्ट शिक्षक होने का , जो सम्पूर्ण विश्व को एक विद्यालय मानते थे । उनका मत था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है  और एक शिक्षक का दिमाग देश में सबसे बेहतर दिमाग होता है , जो सम्पूर्ण विश्व को शिक्षित कर उसे सुविकसित कर सकता है ।

    एक बार डॉ राधाकृष्णन के कुछ छात्रों और दोस्तों ने उनसे कहा कि वो उनके जन्मदिन को सेलिब्रेट करना चाहते हैं , इसके जवाब में डॉ राधाकृष्णन ने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाने की बजाए इसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा । इसके बाद से पूरे भारत में 5 सितम्बर को महान शिक्षाविद् डॉ राधाकृष्कोणन को याद कर शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा । ऐसे महान शिक्षाविद् का जन्म 5 सितम्बर सन् 1888 को हुआ ।

    वास्तव में शिक्षक ही एक ऐसा व्यक्ति होता है जो सिर्फ शिक्षण संस्थान में प्रश्न-उत्तर संबंधी शिक्षा ही नहीं देता बल्कि दुनिया की समझदारी और सही- गलत का अंतर भी बताता है ।

    डॉ॰ राधाकृष्णन समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। अत: विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबन्धन करना चाहिए। ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में दिये अपने भाषण में डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था- “मानव को एक होना चाहिए। मानव इतिहास का संपूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति तभी सम्भव है जब देशों की नीतियों का आधार पूरे विश्व में शान्ति की स्थापना का प्रयत्न हो।” डॉ॰ राधाकृष्णन अपनी बुद्धि से परिपूर्ण व्याख्याओं, आनन्ददायी अभिव्यक्तियों और हल्की गुदगुदाने वाली कहानियों से छात्रों को मन्त्रमुग्ध कर देते थे। उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारने की प्रेरणा वह अपने छात्रों को भी देते थे। वह जिस भी विषय को पढ़ाते थे, पहले स्वयं उसका गहन अध्ययन करते थे। दर्शन जैसे गम्भीर विषय को भी वह अपनी शैली से सरल, रोचक और प्रिय बना देते थे।

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