• Posted by admin on Date Aug 13, 2018
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    आईआईटी में 2800 और सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 5,606 पद खाली

    सरकार द्वारा समय समय पर शिक्षा के स्तर पर सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन शिक्षा में सुधार तब ही लाया जा सकता है जब संस्थानों में फैकेल्टी की कमी को दूर किया जाए। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में संकाय सदस्यों के 5,606 से अधिक पद खाली है, जबकि प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में ऐसी 2,806 रिक्तियां हैं.

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी में 258 पद खाली है। एचआरडी मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनुसार रिक्तियांम कम होने वाली है और इसे भरना एक निरंतर प्रक्रिया है।

    अधिकारी ने बताया कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित ना हो यह सुनिश्चित करने के लिए संकाय की कमी से निपटने के वास्ते संस्थान विभिन्न उपाय कर रहे हैं और इसमें अन्य बातों के साथ शोधार्थियों, अनुबंधित, फिर से नौकरी पाने वाले, सहायक और आमंत्रित सदस्यों की सहायता ली जाती है. संस्थान संकाय को आकर्षित करने के लिए साल भर का विज्ञापन भी प्रकाशित करती है.

    इन संस्थानों के अलावा, कई सारे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) में 324 पद खाली है. प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर स्कूल में 96, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलूरू में 88, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआरएस) में 100 पद खाली हैं. इससे पहले एचआरडी की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों में चार साल से 45 फीसदी सीट खाली है.

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